Hebrews 12

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히브리서 12장은 지친 믿는 자들을 향해 예수를 바라보며 달리고 징계를 이해하며 흔들리지 않는 나라를 거룩한 두려움으로 받으라고 부른다.

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히브리서 12장은 구경꾼이 아니라 멈추고 싶을 만큼 지친 믿는 자들을 위해 쓰였다. 그래서 히브리서 12:1-3은 경주를 자기 진정성에 대한 시선이 아니라 예수를 향한 시선으로 시작한다. 그다음 이 장은 고통을 해석한다. 히브리서 12:5-11에서 징계는 버림의 표지가 아니라 아버지께서 자녀를 빚으시는 방식 가운데 하나다. 그러나 이 장은 위로만으로 끝나지 않는다. 히브리서 12:14-17에서 거룩은 급해지고 에서는 경고가 된다. 마지막으로 히브리서 12:18-29는 독자를 시내산에서 시온으로 옮기며 우리 하나님은 소멸하는 불이라고 선언한다. 히브리서 12장이 중요한 이유는 네가 징계 없는 인내와 두려움 없는 예배와 거룩 없는 소망을 원하고 있는지, 아니면 하나님의 조건대로 흔들리지 않는 나라를 받으려 하는지를 묻기 때문이다.

How the chapter unfolds

이 장은 예수께 시선을 두는 경주에서 아버지의 징계와 거룩의 긴급함과 시내산과 시온의 대비로 나아간다.

Why this chapter matters

이 장이 중요한 이유는 인내와 고난과 아들 됨과 예배를 여전히 말씀하시는 하나님 앞에서 하나로 묶기 때문이다.

Interpretive tension to watch

이 장을 막연한 위로로 약화시키지 말라. 여기에는 아픈 징계와 급한 거룩과 소멸하는 불이 있다.

이 장을 위한 질문

  • 왜 히브리서 12장은 인내를 자기 힘이 아니라 예수를 바라보는 데 뿌리내리게 하는가?
  • 이 장은 고통을 버림이 아니라 아들의 징계로 어떻게 다시 읽게 하는가?
  • 시내산과 시온의 대비는 예배와 나라를 받는 일에 대해 무엇을 드러내는가?

Study with context

Use this as a chapter guide, then press deeper into the text itself. The goal is to slow down observation, notice structure, and ask better questions before jumping to conclusions.

1 इस कारण जबकि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हमको घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकनेवाली वस्तु, और उलझानेवाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुःख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। (1 पत. 2:23,24, तीतु. 2:13,14) 3 इसलिए उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर साहस न छोड़ दो। 4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उससे ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लहू बहा हो। 5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों के समान दिया जाता है, भूल गए हो: “हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो साहस न छोड़। 6 क्योंकि प्रभु, जिससे प्रेम करता है, उसको अनुशासित भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको ताड़ना भी देता है।” 7 तुम दुःख को अनुशासन समझकर सह लो; परमेश्वर तुम्हें पुत्र जानकर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिसकी ताड़ना पिता नहीं करता? (नीति. 3:11,12, व्यव. 8:5, 2 शमू. 7:14) 8 यदि वह ताड़ना जिसके भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्तान ठहरे! 9 फिर जबकि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे और हमने उनका आदर किया, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी अधीन न रहें जिससे हम जीवित रहें। 10 वे तो अपनी-अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उसकी पवित्रता के भागी हो जाएँ। 11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तो भी जो उसको सहते-सहते पक्के हो गए हैं, बाद में उन्हें चैन के साथ धार्मिकता का प्रतिफल मिलता है। 12 इसलिए ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो। (यशा. 35:3) 13 और अपने पाँवों के लिये सीधे मार्ग बनाओ, कि लँगड़ा भटक न जाए, पर भला चंगा हो जाए। (नीति. 4:26) 14 सबसे मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। (1 पत. 3:11, भज. 34:14) 15 और ध्यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूटकर कष्ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएँ। (2 यूह. 1:8, व्यव. 29:18) 16 ऐसा न हो, कि कोई जन व्यभिचारी, या एसाव के समान अधर्मी हो, जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहलौठे होने का पद बेच डाला। (कुलु. 3:5, उत्प. 25:31-34) 17 तुम जानते तो हो, कि बाद में जब उसने आशीष पानी चाही, तो अयोग्‍य गिना गया, और आँसू बहा बहाकर खोजने पर भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला। 18 तुम तो उस पहाड़ के पास जो छुआ जा सकता था और आग से प्रज्वलित था, और काली घटा, और अंधेरा, और आँधी के पास। 19 और तुरही की ध्वनि, और बोलनेवाले के ऐसे शब्द के पास नहीं आए, जिसके सुननेवालों ने विनती की, कि अब हम से और बातें न की जाएँ। (निर्ग. 20:18-21, व्यव. 5:23,25) 20 क्योंकि वे उस आज्ञा को न सह सके “यदि कोई पशु भी पहाड़ को छूए, तो पथराव किया जाए।” (निर्ग. 19:12-13) 21 और वह दर्शन ऐसा डरावना था, कि मूसा ने कहा, “मैं बहुत डरता और काँपता हूँ।” (व्यव. 9:19) 22 पर तुम सिय्योन के पहाड़ के पास, और जीविते परमेश्वर के नगर स्वर्गीय यरूशलेम के पास और लाखों स्वर्गदूतों, 23 और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिनके नाम स्वर्ग में लिखे हुए हैं और सब के न्यायी परमेश्वर के पास, और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्माओं, (भज. 50:6, कुलु. 1:12) 24 और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है। 25 सावधान रहो, और उस कहनेवाले से मुँह न फेरो, क्योंकि वे लोग जब पृथ्वी पर के चेतावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर न बच सके, तो हम स्वर्ग पर से चेतावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर कैसे बच सकेंगे? 26 उस समय तो उसके शब्द ने पृथ्वी को हिला दिया पर अब उसने यह प्रतिज्ञा की है, “एक बार फिर मैं केवल पृथ्वी को नहीं, वरन् आकाश को भी हिला दूँगा।” (हाग्गै. 2:6, न्याय. 5:4, भज. 68:8) 27 और यह वाक्य ‘एक बार फिर’ इस बात को प्रगट करता है, कि जो वस्तुएँ हिलाई जाती हैं, वे सृजी हुई वस्तुएँ होने के कारण टल जाएँगी; ताकि जो वस्तुएँ हिलाई नहीं जातीं, वे अटल बनी रहें। (हाग्गै 2:6) 28 इस कारण हम इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिसके द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिससे वह प्रसन्न होता है। 29 क्योंकि हमारा परमेश्वर भस्म करनेवाली आग है। (व्यव. 4:24, व्यव. 9:3, यशा. 33:14)

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주석 성경

구절별 노트

구절 12:5-11 Standard

아버지의 징계는 아프지만 버림이 아니다

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히브리서 12장은 아들을 교정 없이 내버려 두는 것을 사랑이라 부르지 않는다. 고통은 거절의 증거가 아니라 아들 됨의 표지로 해석된다.

배경과 언어적 통찰 원어 세부사항, 문화적 배경, 그리고 이것들이 이 장의 읽기를 어떻게 바꾸는지.
깊이

원어 통찰

히브리서 12:11 · Greek 텍스트로 이동

gymnazō (gymnazo)

직역: 훈련하다 / 단련하다

이 용어는 가벼운 교정이 아니라 지속적이고 엄한 훈련을 말한다.

히브리서 12장을 아버지의 형성적 징계에 대한 더 구체적인 장으로 보게 한다.

배경

문화적 맥락

히브리서 12 · 가문 명예와 징계와 언약 공동체 텍스트로 이동

성경의 세계에서 아버지의 징계는 버림이 아니라 아들과 집의 이름에 대한 책임으로 이해되었다. 히브리서 12장은 바로 그 형성과 소속의 논리 안에서 말한다.

현대 독자는 징계를 차가운 엄격함으로만 듣기 쉽고 교정과 아들 됨과 거룩 사이의 연결을 놓친다.

이것은 히브리서 12장을 하나님의 버리심이 아니라 소속과 형성에 대한 장으로 읽게 한다.

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